प्रवाल एवं प्रवाल भित्तियाँ (Coral and Coral Reefs)

 

प्रवाल एवं प्रवाल भित्तियाँ 

(Coral and Coral Reefs) 


प्रवाल (Coral) अथार्त मूंगा, संघ सिलेंट्रेटा का एक समुद्री जीव है . जो उष्णकटिबन्धीय महासागरो में पाया जाता है . यह पाना निर्वाह चूने से करता है . एक स्थान पर असंख्य मूंगे एक साथ समूह में रहते है तथा चारो ओर चूने का खोल बनाते है . मूंगा मर जाता है तो उसकी खोल के ऊपर दूसरा मूंगा अपनी खोल बनाने लग जाता है . इस क्रिया के कारण एक लम्बे समय के अन्दर एक विस्तृत भित्ति (Reef) बन जाती है, जिसे प्रवाल भित्ति (Coral Reef) कहते है . 

प्रवाल के विकास के लिए आवश्यक दशाएं

प्रवाल के विकास के लिए आवश्यक दशाएं इस प्रकार है -

1. प्रवाल के विकास के लिए 20-25डिग्री सेल्सियस तापक्रम उपयुक्त होता है . 

2. सूर्य किरणों के प्रवेश्य तक की सामुद्रिक गहराई 

3. सागरीय जल अवसाद मुक्त होना चाहिये . 

4. सामान्य सामुद्रिक लवणता

 5. अन्त: सागरीय चबूतरो की उपस्थिति एवं मानवीय आर्थिक क्रियाकलापों से विमुक्त क्षेत्रो की आवश्यकता होती है . 

नोट- पूर्ण स्वच्छ जल, प्रदूषण युक्त क्षेत्र, अधिक गहराई एवं लवणता इनके विकास में बाधक होते है . 


प्रवाल भित्तियों के प्रकार 

रचना के आधार पर प्रवाल भित्तियों को तीन वर्गों में रखा गया है -

1. तटीय प्रवाल भित्ति (Fringing Reef) - महाद्वीपीय या द्वीप के किनारे निर्मित्त होने वाले प्रवाल भित्ति को तटीय प्रवाल भित्ति कहते है, जैसे - दक्षिण फ्लोरिडा, भारत में रामेश्वर के निकट मन्नार की खाड़ी और मलेशिया के द्वीपों के सहारे ये प्रवाल भित्ति पायी जाती है . 


2. अवरोधक प्रवाल भित्ति (Barrier Reef) - सागरतट के सामान्तर कुछ दूरी पर स्थित वृहदाकार प्रवाल भित्ति को अवरोधक प्रवाल भित्ति (Barrier Reef) कहते है . यह सभी प्रकार की भित्तियों से अधिक लम्बी, चौड़ी तथा ऊँची होती है . इनका ढाल 25  ० से 45 ०  तक होता है . तट तथा इनके बीच छिछली लैगून झील पायी जाती है . 

महान अवरोधक प्रवाल भित्ति (Great Barrier Reef) - विश्व की सर्वप्रमुख अवरोधक प्रवाल भित्ति महान अवरोधक प्रवाल भित्ति (Great Barrier Reef) है, जो ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य के उत्तर-पूर्वी तट के सहारे 9 डिग्री से 22 डिग्री दक्षिण अक्षांशो के मध्य 1920 किमी. की लम्बाई में तट से 32 से 48 किमी. दूर स्थित है . 


3. प्रवाल वलय या एटाल (Coral Ring or Attol) - ऐसी प्रवाल भित्ति जो किसी द्वीप या जलमग्न पठार के चारो ओर अण्डाकार रूप में पायी जाती है, प्रवाल वलय के रूप में जानी जाती है . यह घोड़े के नाल या अँगूठी सदृश्य होने के कारण एटाल (Attol) की संज्ञा से भी अभिहित की जाती है . विश्व प्रसिद्ध फुराफुटी एटाल एवं लक्षद्वीप समूह के एटाल आदि है . सर्वाधिक एटाल एंटीलीज सागर में पाये जाते है . 


प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) - सागरीय जल के तापमान में वृद्धि होने से प्रवालों के मुख्य भोजन वाले हरे रंग के शैवालों का रंग प्रकाश संश्लेषण में बाधा उत्पन्न होने के कारण सफेद हो जाता है, जिसे प्रवाल ग्रहण नहीं करते और मरने लगते है . इसे ही प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) कहते है . 

सर्वाधिक प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) से प्रभावित महासागर हिन्दमहासागर है . जिसका मुख्य कारण भूमंडलीय तापन (Global Warming) एवं गर्म समुद्री जलधारा एलनीनो भी है . 

वर्तमान समय में विश्व के लगभग 58% प्रवाल संकटापन्न की स्थिति में है . 

प्रवालो में अत्याधिक विविधता पाये जाने के कारण प्रवाल भित्तियों को महासागरीय वर्षा वन के नाम से भी जाना जाता है . 

 

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